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श्री अग्रसेन जी का जीवन परिचय

हरियाणा प्रांत में सरस्वती, इष्टवती और घग्घर नदी के संगम पर एक छोटा सा प्रताप नगर का राज्य था। बल्लभसेन की महारानी का नाम भगवती देवी था। बल्लभ सेन के पिता का नाम व्रहतसेन था, जिनका उल्लेख महाभारत मे आया है। प्रताप नगर 20 गांवों का एक छोटा सा राज्य था। बल्लभसेन के छोटे भाई का नाम कुंदसेन था। केशी उनके सेनापति का नाम था। दुर्भाग्य से बल्लभसेन के कोई पुत्र ना था। छोटे भाई कुंदसेन का पुत्र 1 वर्ष का हो चुका था। प्रजा ने श्री वल्लभ से दूसरा विवाह करने का आग्रह किया किंतु सूर्यवंशी क्षत्रिय एक पत्नी धारी होते हैं ऐसा निश्चय सुनते हुए राजा बल्लभ ने दूसरे विवाह से इनकार कर दिया। कुंदसेन को भाई के इस विचार से बड़ी खुशी हुई कि निकट भविष्य में उसका पुत्र ही राजा बनेगा। परंतु विधाता को कुछ और मंजूर था। राजा बल्लभ और विदर्भ की कन्या भगवती देवी ने मिलकर शिवजी की आराधना की शिव जी ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि तुम्हारे दो पुत्र होंगे। कालांतर में अग्रसेन जी का जन्म हुआ।

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